Thursday, 26 February 2015

Benefits of kissing



                        किस के फायदे


          Kiss के दौरान शरीर में एड्रेनालिन नामक हार्मोन बनता है जो दिल के लिए बहुत फायदेमंद है। यह पूरे शरीर में रक्तसंचार के लिए पंप होने में दिल की मदद करता है। इससे ब्लडप्रेशर कम करने और शरीर में रक्तसंचार ठीक रखने में मदद मिलती है। तो अब न सिर्फ दिल को खुश करने बल्कि इसे सेहतमंद रखने के लिए Kiss करें।
         मोतियों जैसे सफेद दांतों की ख्वाहिश रखते हैं तो Kiss करना आपके लिए फायदेमंद है। Kiss के दौरान मुंह में बनने वाली लार दांतों से कैविटी को दूर करती है और बैक्टीरिया को खत्म करती है। 
          हाल में 'मेडिकल हाइपोथेसिस' नामक जर्नल में प्रकाशित शोध के अनुसार Kiss करने से महिलाओं की प्रतिरोधी क्षमता बढ़ती है। यह महिलाओं को 'साइटोमेगालोवायरस' से बचाने में मदद करती है जो गर्भावस्था में शिशु को जन्मजात अंधा बना सकता है। यह वायरस तभी नुकसान पहुंचाता है जब महिलाएं गर्भवती होती हैं, अन्यथा इससे कोई विशेष नुकसान नहीं होता। 
          कैलोरी घटाने के लिए भी Kiss करना फायदेमंद है। करीब एक मिनट की किस के दौरान दो से तीन कैलोरी बर्न होती है। इतना ही नहीं, इससे शरीर के मेटाबॉलिक रेट भी बढ़ जाती है। 
          दिनभर का तनाव और थकान मिटाने के लिए आपके साथी की एक प्यार Kiss किस ही काफी है। Kiss के दौरान शरीर में कोर्टिजोल का स्तर कम होता है, जिससे शरीर का तनाव दूर होता है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।
          पैशन से भरी एक Kiss में 34 फेशियल मसल्स व शरीर की 112 पॉश्च्यरल मसल्स का इस्तेमाल होता है। इससे मांसपेशियां टाइट व टोन्ड रहती हैं। इससे चेहरे में रक्त का संचार तेज होता है और लंबे समय तक युवा दिख सकते हैं।

Healthy Skin

                                                       त्वचा को स्वस्थ रखने के नुस्खे
  • रोजाना खूब सारा पानी पीजिये और अंदर से तरोताजा रहिये। इससे शरीर से गंदगी बाहर निकलती है और बॉडी में नए सेल्‍स बनते हैं।
  • आपको हर दिन 2 गिलास जूस अवश्‍य पीना चाहिये। इससे स्‍किन में पोषण पहुंचता है और स्‍किन भी चमकती है।
  • अपनी डाइट में नींबू का प्रयोग करें। इसमें विटामिन ‘C’ पाया जाता है जो कि शरीर से गंदगी को दूर करता है। नींबू को चाहे तो सलाद में छिड़ककर खाएं या फिर गर्म पानी में निचोड़कर पी जाएं।
त्वचा के और भी ऐसे ही छोटे-छोटे और यूसफुल नुस्खों के लिए क्लिक करें--------------http://jkhealthworld.com/hindi/मुलायम-त्वचा
  • त्वचा को मुलायम बनाने के लिए नींबू के रस, पपीते और शहद, को एकसाथ मिक्स करके चेहरे पर 10 मिनट के लिए लगाएं।
  • अखरोट में ओमेगा 3 फैटी एसिड पाया जाता है जो कि स्‍किन के लिये बहुत अच्‍छा माना जाता है। इसके अलावा आप इसके तेल से अपनी त्‍वचा की मसाज भी कर सकती हैं। इससे आप कुछ ही समय में जवान दिखने लगेगीं।
 



Benefits of basil


                                                            तुलसी के फायदे
              पेड़-पौधे हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण हैं। इनसे हमें ऑक्सीजन मिलती है। ये कई तरह से हमारे लिए उपयोगी हैं। अगर हम तुलसी की ही बात करें तो लगभग हर घर के आंगन में तुलसी का पौधा मिल जाता है। इसकी पूजा भी की जाती है। तुलसी जितनी पूजनीय है, उतनी ही ये सेहत के लिए लाभदायक है। तुलसी में बीमारियों को ठीक करने की जबर्दस्त क्षमता होती है। इसकी तासीर गर्म होती है।
तुलसी

            अगर आपको बार-बार उल्टी हो रही है और तो तुलसी के रस का इस्तेमाल करें। तुलसी के रस में अदरक का रस और शहद मिलाकर पीएं। इससे उल्टी में राहत मिलेगी।
            अगर आपको किडनी में स्टोन की समस्या है तो इससे निजात पाने के लिए 6 महीनों तक नियमित रूप से तुलसी के रस में शहद मिलाकर सेवन करें। इससे किडनी का स्टोन आसानी से निकल जाता है।
            तुलसी के नियमित सेवन से खून में पाई जाने वाली अशुदि्धयों का सफाया होता है। साथ ही गर्मियों में लू लगने पर भी तुलसी के सेवन से लाभ मिलता है।
            दांतों में कीड़ा लग गया हो तो परेशान ना हो। तुलसी के रस में देसी कपूर मिलाएं और इसे रूई में भिगोकर लगाएं। इससे दांतों में आराम मिलता है और कीड़ों का भी सफाया होता है। वहीं खांसी होने पर तुलसी को अदरक के साथ पीस लें और उसे शहद लगाकर चाटे। इससे खांसी ठीक होने लगेगी।
            तुलसी में काली मिर्च और मिश्री मिलाकर उन्हें पानी में उबाल लें और फिर इसका सेवन करें। इससे बुखार और जुकाम में राहत मिलती है। तुलसी को चाय में डालकर आप हर्बल टी बना सकते हैं। इससे इम्युनिटी बढ़ती है और खांसी-जुकाम में आराम मिलता है। एक कप चाय में तुलसी की चार पत्तियां प्रयोग में ली जा सकती हैं।
            जली हुई स्किन के लिए तुलसी इस्तेमाल करें। इसके लिए तुलसी का रस नारियल तेल में मिलाकर लगाएं। तुलसी के रस से जलन कम होने के साथ-साथ जख्म भी ठीक होगा और निशान भी हल्का पड़ जाएगा।
            तुलसी के पत्ते, बीज, जड़ को बराबर मात्रा में कूट लें। फिर इसे छानकर गुड़ के साथ मिला लें और बकरी के दूध के साथ सुबह-शाम सेवन करें। इससे गठिया रोग में राहत मिलती है।
            तुलसी को एंटी स्ट्रेस (तनाव) एजेंट माना जाता है। तुलसी की 12 पत्तियां दिन में 2 बार खाने पर खून की सफाई होती है, तनाव से आराम मिलता है। साथ ही रोज सुबह तुलसी के 6-7 पत्तियां खाने से मैमोरी शार्प होती है।
            चेहरे में निखार लाने, पिंपल दूर करने और झाईयां हटाने के लिए तुलसी को पीसकर चेहरे पर लगाएं। साथ ही ये चेहरे के ब्लैकहैड्स को भी दूर करता है। इसके लिए तुलसी के पत्ते को ऊपर की तरफ से भिगोएं और उसे नाक के दोनों तरफ 5 मिनट के लिए रखें। इसके बाद इसे हटाकर चेहरा धो लें। 
तुलसी के और भी कई सारे फायदे जानने के लिए यहां क्लिक करें----------------http://jkhealthworld.com/hindi/तुलसी

Wednesday, 25 February 2015

Dark circle

आंखों के नीचे के काले घेरे

कई बार काम के तनाव, नींद की कमी और अन्य कारणों से आंखों के नीचे काले घेरे पड़ जाते हैं जो किसी भी महिला की खूबसूरती को कम करने के लिए काफी हैं, लेकिन अब परेशान होने की जरूरत नहीं है क्योंकि हम आपको बताने वाले हैं कुछ ऎसे आसान उपाय जिनसे आपकी आंखों के नीचे काले घेरे मिट जाएंगे और आप पहले की तरह खूबसूरत दिखने लगेंगी-
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  • टमाटर और नींबू के रस को बराबर मात्रा में लेकर उसमें 1 चम्मच बेसन मिलाएं। इस पेस्ट को काले घेरों पर लगाएं और 10 मिनट तक रखें। उसके बाद चेहरा धो लें। कुछ दिनों बाद ही आपको फर्क नजर आने लगेगा।
  • 1 चम्मच शहद में 1 चम्मच बादाम का तेल मिलाएं और इस मिश्रण को काले घेरों पर लगाकर सो जाएं। सुबह उठकर ठंडे पानी से चेहरा धो लें। इससे भी काले घेरे हल्के पड़ने लगेंगे।
  • आंखों के नीचे काले घेरे होने का सबसे बड़ा कारण नींद की कमी है। आपको रोज कम से कम 7-9 घंटे सोना चाहिए। इससे आप सुबह उठकर बिल्कुल तरोताजा महसूस करेंगे और काले घेरे भी धीरे-धीरे कम होने लगेंगे।
  • विटामिन की कमी के चलते भी काले घेरे हो जाते हैं। इसलिए खाने में हेल्दी डाइट लें। ऎसा खाना खाएं जिसमें प्रचुर मात्रा में विटामिन ‘C’ और विटामिन ‘K’ हो। ताजे फल और सब्जियों को अपने खाने में शामिल करें।
  • आंखों पर बर्फ की क्यूब या खीरा लगाएं। इससे आंखों के नीचे की सूजन कम हो जाएगी और काले घेरे मिटने लगेंगे। ऎसा करने से आंखों की थकावट दूर होती है और आंखों को ठंडक पहुंचती है।

Swine flu

                     स्वाइन फ्लू

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Swine Flu
आज के समय में स्वाइ
न फ्लू ने सारे देश में दहशत मचा रखी है। अचानक यह रोग महामारी  की तरह फैली और देखते ही देखते महानगरों को अपनी चपेट में ले लिया। आमतौर पर पशुओं और पालतू जानवरों को होने वाले वायरस के हमले कभी इंसानों तक नहीं पहुंचते। इसकी वजह यह है कि जीव विज्ञान की दृष्टि से इंसानों और जानवरों की बनावट में फर्क है। अभी देखा यह गया था कि जो लोग सूअर पालन के व्यवसाय में हैं और लंबे समय तक सूअरों के संपर्क में रहते हैं, उन्हें स्वाइन फ्लू होने का जोखिम अधिक रहता है।
      मध्य 20वीं सदी से अब तक के चिकित्सा इतिहास में केवल 50 मामले ही ऐसे हैं जिनमें वायरस सूअरों से इंसानों तक पहुंचा हो। ध्यान में रखने योग्य यह बात है कि सूअर का मांस खाने वालों को यह वायरस नहीं लगता क्योंकि पकने के दौरान यह नष्ट हो जाता है।

स्वाइन फ्लू की तरह और भी कई खतरनाक रोगों के बारे में पूरी जानकारियां और बचाव के तरीके को बारे में जानने के लिए क्लिक करें यहां------------jkhealthworld.com
क्या है स्वाइन फ्लू-
       स्वाइन फ्लू के लक्षण भी सामान्य एन्फ्लूएंजा के लक्षणों की तरह ही होते हैं। बुखार, तेज ठंड लगना, गला खराब हो जाना, मांसपेशियों में दर्द होना, तेज सिरदर्द होना, खाँसी आना, कमजोरी महसूस करना आदि लक्षण इस रोग के दौरान उभरते हैं। इस साल इंसानों में जो स्वाइन फ्लू का संक्रमण हुआ है, वह तीन अलग-अलग तरह के वायरसों के सम्मिश्रण से उपजा है। फिलहाल इस वायरस के उद्गम अज्ञात हैं।
      वर्ल्ड ऑर्गनाइजेशन फॉर एनिमल हैल्थ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यह वायरस अब केवल सूअरों तक सीमित नहीं है, इसने इंसानों के बीच फैलने की कुवत हासिल कर ली है। अमेरिका में 2005 से अब तक केवल 12 मामले ही सामने आए हैं। एन्फ्लूएंजा वायरस की खासियत यह है कि यह लगातार अपना स्वरूप बदलता रहता है। इसकी वजह से यह उन एंटीबॉडीज को भी छका देता है जो पहली बार हुए एन्फ्लूएंजा के दौरान विकसित हुई थीं। यही वजह है कि एन्फ्लूएंजा के वैक्सीन का भी इस वायरस पर असर नहीं होता।
क्या है खतरा-
       1930 में पहली बार ए1एन1 वायरस के सामने आने के बाद से 1998 तक इस वायरस के स्वरूप में कोई परिवर्तन नहीं हुआ। 1998 और 2002 के बीच इस वायरस के तीन विभिन्न स्वरूप सामने आए। इनके भी 5 अलग-अलग जीनोटाइप थे। मानव जाति के लिए जो सबसे बड़ा जोखिम सामने है वह है स्वाइन एन्फ्लूएंजा वायरस के म्यूटेट करने का जोकि स्पेनिश फ्लू की तरह घातक भी हो सकता है। चूँकि यह इंसानों के बीच फैलता है इसलिए सारे विश्व के इसकी चपेट में आने का खतरा है।
कैसे बचेंगे स्वाइन फ्लू से-
       सूअरों को एविएन और ह्यूमन एन्फ्लूएंजा स्ट्रेन दोनों का संक्रमण हो सकता है। इसलिए उसके शरीर में एंटीजेनिक शिफ्ट के कारण नए एन्फ्लूएंजा स्ट्रेन का जन्म हो सकता है। किसी भी एन्फ्लूएंजा के वायरस का मानवों में संक्रमण श्वास प्रणाली के माध्यम से होता है। इस वायरस से संक्रमित व्यक्ति का खाँसना और छींकना या ऐसे उपकरणों का स्पर्श करना जो दूसरों के संपर्क में भी आता है, उन्हें भी संक्रमित कर सकता है। जो संक्रमित नहीं वे भी दरवाजा के हैंडल, टेलीफोन के रिसीवर या टॉयलेट के नल के स्पर्श के बाद स्वयं की नाक पर हाथ लगाने भर से संक्रमित हो सकते हैं। 
क्या है सावधानियां-
       सामान्य एन्फ्लूएंजा के दौरान रखी जाने वाली सभी सावधानियाँ इस वायरस के संक्रमण के दौरान भी रखी जानी चाहिए। बार-बार अपने हाथों को साबुन या ऐसे सॉल्यूशन से धोना जरूरी होता है जो वायरस का खात्मा कर देते हैं। नाक और मुँह को हमेशा मॉस्क पहनकर ढकना जरूरी होता है। इसके अलावा जब जरूरत हो तभी आम जगहों पर जाना चाहिए ताकि संक्रमण ना फैल सके। 
क्या है-
       संक्रमण के लक्षण प्रकट होने के दो दिन के अंदर ही रोगी को एंटीवायरल ड्रग देना जरूरी होता है। इससे एक तो रोगी को राहत मिल जाती है तथा रोग की तीव्रता भी कम हो जाती है। तत्काल किसी अस्पताल में रोगी को भर्ती कर दें ताकि पैलिएटिव केअर शुरू हो जाए और तरल पदार्थों की आपूर्ति भी पर्याप्त मात्रा में होती रह सकें। अधिकांश मामलों में एंटीवायरल ड्रग तथा अस्पताल में भर्ती करने पर सफलतापूर्वक इलाज किया जा सकता है।

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