Monday, 16 March 2015

Pregnancy doubt

            गर्भावस्था को लेकर फैली हुई भ्रांतिया

            शारीरिक संबंध बनाने के बाद शॉवर ले लिया तो गर्भवती नहीं होंगी... अरे पहली बार Sex से कोई प्रेग्‍नेंट नहीं होता... नशे में Sex किया है तो गर्भवती होने का चांस ही नहीं है... ऐसी कई बातें गर्भावस्‍था को लेकर चलन में हैं। लेकिन, क्‍या वो पूरी तरह सच हैं या केवल कोरे वहम...

गर्भावस्था को लेकर फैली हुई भ्रांतिया

            अधिकतर लड़के और लड़कियों को यह गलतफहमी होती है कि वे गर्भावस्था और
Sex से जुडे हर मुद्दों के बारे में सब कुछ जानते हैं। लेकिन, हकीकत इससे बहुत अलग है। लड़के और लड़कियों के मन में गर्भावस्था से जुड़े बहुत से वहम होते हैं, इसका परिणाम यह हो रहा है कि किशोर गर्भावस्‍था के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। इस लेख में अपको बताते हैं किशोर गर्भाधारण से जुड़े ऐसे ही कुछ वहम के बारे में, जो किशोर गर्भावस्‍था का कारण बन रहे हैं।
            यह एक वहम है कि अगर लड़की के पीरियड हो रहे हैं तो इस अवधि में शारीरिक संबंध बनाने से वह गर्भवती नहीं होगी। जबकि ऐसा नहीं होता, क्योंकि शुक्राणु योनि के अंदर 7 दिनों तक सक्रिय रूप में रहते हैं। इसलिए इस समय पर भी गर्भधारण की उम्‍मीद बनी रहती है।
            यह भी गलत धारणा है कि पहली बार यौन संबंध बनाने आप गर्भवती नहीं होती। यदि आप या आपका पार्टनर गर्भधारण से बचने के लिए समुचित उपाय नहीं करता तो आपके गर्भवती होने की संभावना बनी रहती है। इसलिए जरूरी है कि शारीरिक संबंध से जुड़े सभी पहलुओं के बारे में जान लें।
            लड़के और लड़कियों में यह गलत धारणा है कि शारीरिक संबंध बनाने के बाद यदि शॉवर ले लिया जाए तो गर्भधारण से बचा जा सकता है। जबकि यह केवल एक वहम है ऐसा करने से गर्भधारण की संभावना को कम नहीं किया जा सकता।
            लोगों में यह भी धारणा है कि महीने में केवल एक दिन ऐसा होता है जिस‍ दिन कोई भी किशोरी गर्भवती हो सकती है, इसके अलावा अन्‍य दिनों में शारीरिक संबंध बनाने से गर्भ नहीं ठहरता।
            लोगों में यह भी वहम है कि शारीरिक संबंध बनाने के बाद यदि आप तुरंत खड़ी हो जाती हैं तो गर्भवती होने की संभावना को कम किया जा सकता है। लेकिन यह गलत धारणा है क्योंकि एक बार सेक्स करने के बाद किसी भी स्थिति में गर्भाधान के जोखिम को कम नहीं किया जा सकता।
            बहुत से लोगों का यह भी मानना है कि यदि आप शराब या ड्रग्‍स का सेवन करने के बाद अपने पार्टनर से शारीरिक संबंध बनाती हैं तो गर्भाधारण नहीं होता। लेकिन ऐसा संभव नहीं है।
            कुछ लोग यह भी मानते हैं कि शारीरिक संबंध बनाने के बाद यदि कोई किशोरी जंपिंग जैक की तरह कूदती हैं तो वह गर्भवती नहीं होती। ऐसा नहीं है कि‍ एक बार शुक्राणु से संपर्क में आने के बाद आप गर्भवती हो जाती है।
            आमतौर पर यह भी माना जाता है कि यदि आप पानी के अंदर शारीरिक संबंध बनाती हैं तो गर्भधारण की संभावना कम होती है। लेकिन यह पूरी तरह से वहम है।
            यदि आप भी अपने पार्टनर के साथ शारीरिक संबंध बनाती हैं तो इन सभी वहम को ध्‍यान में रखकर ही अगला निर्णय लें। इससे आप भविष्‍य में होने वाली किसी भी परेशानी से बची रह सकती हैं।



Saturday, 14 March 2015

Sex benefits during pregnancy

गर्भावस्था में सेक्स के फायदे

क्या गर्भावस्था के दौरान Sex करना चाहिए। क्या Sex संबंधों के दौरान होने वाले बच्चे को कोई हानि होती है। गर्भावस्था के दौरान Sex पोजीशन क्या होनी चाहिए। गर्भावस्था में Sex करते हुए शारीरिक स्फूर्ति आती है या नहीं। गर्भावस्था में Sex करते हुए क्या-क्या सावधानियां बरतनी पड़ती हैं। इन तमाम सवालों को लेकर वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और चिकित्सकों में आज भी मतभेद हैं। लेकिन गर्भावस्था के दौरान लंबे समय तक Sex संबंधों से दूरी बनाना पति-पत्नी के लिए मुश्किल भी होता है। 

आइए जानें किसी प्रकार से गर्भावस्था में भी Sex लाभदायक है-

गर्भावस्था में सेक्स के फायदे

  • यह साबित हो चुका है कि गर्भावस्था के दौरान Sex करने से पुरूष भी अपने होने वाले बच्चे के न सिर्फ अधिक करीब हो जाता है बल्कि वह पत्नी के मानसिक रूप से और अधिक करीब आ जाता है।
  • कुछ अध्ययनों के मुताबिक, गर्भावस्था में भी Sex  लाभदायक हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान Sex करने से इंटिमेसी का FEELING भी बढ़ जाता है।
  • शोध में यह भी साबित हुआ है कि Sex  और Sexuality दो बिल्कुल अलग-अलग चीजें हैं और महिलाएं बिना Sex के भी Sexuality को एक्सप्रेस कर सकती हैं। ऎसे में पति-पत्नी Oral Sex करके भी एक दूसरे को प्यार-दुलार आदि से खुशियां दे सकते हैं, जो एक-दूजे को इस वक्त करीब रखने के लिए अहम साबित हो सकते है। यानी Sex  किए बिना भी Sex की अनुभूति दोनों एक-दूसरे को दे सकते हैं। 
  • गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर  में शारीरिक और भावनात्मक दोनों तरह के बदलाव आते हैं। इस दौरान महिलाएं जहां खुद को विशाल और बेचैनी से भरा महसूस करने लगती हैं, वहीं पुरूषों को गर्भवती शरीर काफी कामुक और वांछनीय लगने लगता है।
  • आमतौर पर पत्नी के गर्भवती होने का पता चलते ही शुरू के दो महीने तक Sex करने से बचना चाहिए और गर्भावस्था के अन्तिम 1 महीने में भी Sex से दूर रहने का प्रयास करना चाहिए।
  • Sex करने के लिए पति-पत्नीं को चिकित्सक से सलाह लेनी चाहिए। ऐसे में वह कुछ अन्य सही Sex पोजीशन को अपनाकर आप आराम से Sex कर सकते हैं, इससे महिला को भी परेशानी नहीं होगी।
  • गर्भावस्था के दौरान जरूरी है कि महिला भी प्रसन्न मन से Sex करें अन्यथा उसे मानसिक और शारीरिक दोनों ही तरह की हानि पहुंच सकती हैं।
  • गर्भावस्था के दौरान विशेष ध्यान रखना चाहिए कि पत्नी पर Sex के लिए दबाव न डालें। गर्भ के समय पत्नी के साथ ऐसा कोई व्यवहार न करें जिससे उसके मन-मस्तिष्क पर विपरीत प्रभाव पड़ें।
नोट- गर्भावस्था में Sex करने में कोई दिक्कत नहीं है लेकिन चिकित्सक की सलाह और थोड़ी सी सावधानी रखना भी जरूरी हो जाता है। ऐसे में आपकी थोड़ी सी लापरवाही कोई बड़ी परेशानी भी बन सकती है।

Friday, 13 March 2015

Pain during first time sex

पहली बार सेक्स के दौरान दर्द क्यों होता है

विवाह-और-यौन

पहली बार
Sex को लेकर कई तरह के मिथ जुड़े हुए हैं। लोगों का ऐसा मानना है कि पहली बार Sex के समय में लड़कियों को काफी दर्द होता है। इस दौरान ब्लीडि़ग को लेकर भी हमारे समाज में अनेक तरह की भ्रांतियां मौजूद हैं। क्या सचमुच पहली बार का Sex कष्टदायक होता है? Sex करने की स्थिति से दर्द का क्या नाता  है? ऐसे कुछ भ्रम लोगों के मन में अक्सर रहते हैं। कैसे आप इस दर्द से निजात पाकर Sex संबंधों का आनंद ले सकते हैं और अपने रिश्तों को सामान्य बना सकते हैं। आइए जानें क्या Sex के दौरान दर्द होना सामान्य है या ये सिर्फ एक मिथ है?
            Sex के दौरान होने वाले दर्द को मेडीकल की भाषा में दाईस्पेरेनिया कहते हैं। यह ऐसा दर्द है जो एक बार होने पर बार-बार हो सकता है और इस दर्द का असर महिला-पुरूषों के रिश्ते पर बहुत बुरा पड़ता है
            वास्तव में पहली बार Sex के समय महिलाओं को होने वाले दर्द का मुख्य कारण योनि का बहुत ज्यादा टाइट होना है। ऐसा तब होता है जब योनि की मांसपेशियां खींच जाती हैं और उनमें सूजन आ जाती है। ऐसी स्थिति में Sex के समय महिला को बहुत अधिक दर्द होता है। ऐसा उन स्त्रियों के साथ होने की संभावना रहती है जो Sex संबंधों को बहुत बुरा मानती हैं और Sex के समय पुरूष के साथ सहयोग नहीं करती। इसका मनोवैज्ञानिक असर यह होता है कि Sex के समय योनि की मांसपेशिया सिकुड़ जाती हैं और तेज दर्द होता है।
            योनि में किसी भी तरह का इंफेक्शन भी Sex के समय दर्द का एक बहुत बड़ा कारण है। अकसर योनि के आकार में परिवर्तन हो जाता है जिसे एंड्रियोमेट्रियोसिस कहते हैं। यदि आपको भी Sex के दौरान दर्द होता है तो आपको तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
            Sex के दौरान होने वाले दर्द का एक मनोवैज्ञानिक कारण भी है। लड़कियों की परवरिश बचपन से ही इस तरह से की जाती है कि SEX को लेकर उनके मन में डर बैठ जाता है। वह Sex के नाम से ही घबराने लगती हैं और उन्हें अपनी किशोरावस्था और युवावस्था के दौरान यह भी सुनने को मिलता है कि पहली बार किया गया Sex बहुत कष्टदायक होता है और इस दौरान खूब ब्लीडिंग भी होती है। लंबे समय तक यह भी माना जाता रहा है कि यदि पहली बार Sex के दौरान ब्लीडिंग न हो तो लड़की पहले Sex कर चुकी है। ये तमाम बातें लड़की के मन में मनोवैज्ञानिक रूप से Sex के प्रति डर पैदा कर देती है और इस तरह की लड़कियों को पहली बार Sex के दौरान अकसर दर्द की शिकायत होती है।

            यदि आप चाहते हैं कि आपको Sex के दौरान दर्द ना हो तो आपको कुछ Sex पोजीशंस का इस्तेमाल पहली बार Sex के दौरान करना चाहिए और आपको अपने मन से Sex में होने वाले दर्द व अन्य मिथों को दूर कर देना चाहिए।

What is Virginity

            वर्जिनिटी के मायने

परिवार-कल्याण-नियोजन

हमेशा से महिलाओं की Virginity बेहद खास चीज़ मानी जाती रही है। Virginity को मूल्यों और संस्कारों से जोड़कर देखा जाता रहा है। खास तौर पर महिलाओं की Virginity पर ज्यादा जोर दिया जाता है। हालांकि अब यह धारणाएं टूट रही है। शादी से पहले
SEX अब कोई वर्जित विषय नहीं रहा।हालांकि शादी और खासकर अरेंज मैरिज की बात आती है, तो कई लोग की सोच अभी भी पहले जैसी ही है। उनके लिए Virginity काफी मायने रखती है। हमारे समाज में इस तरह की मानसिकता वाले लोगों की तादाद बड़ी संख्या में है। ऐसा इसलिए क्योंकि ये सारी बातें हमारी संस्कृति और परंपरा में मजबूती से बनी हुई हैं। ऐसे कई मर्द हैं जो अभी भी जानना चाहते हैं कि उनकी गर्लफ्रेंड या पत्नी Virgin है या नहीं? इसका साफ जवाब है कि इसे जानने का कोई रास्ता नहीं है।

          कई मर्दों की पुरानी शिकायत है कि पहली रात में उनकी पत्नी को ब्लीड (खून निकलना) नहीं हुआ। इसका मतलब है कि लड़की Virgin नहीं है। यह पूरी तरह से बेवकूफाना सोच है कि ब्लीड नहीं हुआ तो लड़की Virgin नहीं है। ऐसा सभी के साथ जरूरी नहीं है। फैक्ट्स कहते हैं कि सिर्फ 42 प्रतिशत महिलाओं को ही पहले इंटरकोर्स (संभोग) के दौरान ब्लीडिंग होती है। इसलिए यह कहना समझदारी नहीं है कि पहली बार ब्लीड करने का मतलब Virgin होना है।

          सच तो ये है कि फीमेल प्राइवेट पार्ट (योनि) में मौजूद हाइमन के रप्चर होने से ब्लीडिंग होना Virginity का सबूत नहीं है। सच यह है कि कुछ महिलाओं में तो हाइमन जन्म से नहीं होती। कई महिलाओं में यह लेयर बेहद इलास्टिक होती है और इंटरकोर्स के दौरान भी रप्चर नहीं होती। यही नहीं, कई महिलाओं को इसके रप्चर होने के बारे में पता ही नहीं चलता। हाइमन को SEX किए बिना दूसरी वजहों से भी नुकसान पहुंच सकता है। स्पोर्ट्स, स्विमिग, डांसिंग, घुड़सवारी या टू-वीइकल्स पर पांव इधर-उधर करके बैठने से भी इसे नुकसान पहुंच सकता है।

          कोई लड़की Virgin है या नहीं, इसका पता दो ही तरीकों से चल सकता है- या तो वह प्रेगनेंट हो चुकी हो या फिर वह खुद स्वीकार कर ले।

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Infertility problum

 बांझपन की समस्या को कैसे करे दूर

           बांझपन एक ऐसी अवस्‍था है जिसमें लगातार बिना किसी गर्भनिरोधक के प्रयोग के बावजूद भी महिला गर्भधारण करने में असफल रहती है। इसके लिए पूरी तरह से महिला ही जिम्‍मेदार नहीं होती है बल्कि कई मामलों में पुरुष भी इसके लिए जिम्‍मेदार हो सकते हैं। लगभग एक तिहाई मामलें महिलाओं की समस्याओं के कारण होते हैं। अन्य एक तिहाई इनफर्टिलिटी मामले पुरुषों के कारण होते हैं। बाकी मामले पुरुष और महिला दोनों की समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं। इसके निदान के लिए कुछ जांच आपकी मदद कर सकते हैं।
  • अगर आप गर्भधारण नहीं कर पा रही हैं तो हार्मोन के स्‍तर की जांच भी करायें। हार्मोन के स्‍तर में असंतुलन होने से ओव्‍यूलेशन और गर्भधारण करने में समस्‍या होती है। प्रोलेक्टिन हार्मोन, एंटी मुलेरियन हार्मोन, एस्‍ट्रोजन हार्मोन की जांच करायें। इसकी जांच के लिए एचसीजी और एक्‍स-रे किया जाता है।
  • सीबीसी यानी कंप्‍लीट ब्‍लड टेस्‍ट के जरिये गर्भधारण न हो पाने की मूल बात सामने आ जाती है। इस जांच में रेड ब्‍लड सेल्‍स, ह्वाइट ब्‍लड सेल्‍स और प्‍लेटलेट्स की जांच की जाती है। इस जांच में रक्‍त से जुड़ी समस्‍याओं जैसे - रक्‍त संक्रमण, एनीमिया आदि की जानकारी हो जाती है। अगर आप रक्‍त संबंधित समस्‍या से ग्रस्‍त हैं तो इनविट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) तकनीक आपके लिए फायदेमंद है, क्‍योंकि इसमें सर्जरी के जरिये अंडाणु को निषेचित कराया जाता है।
  • ईएसआर यानी एरीथ्रोक्राइट सेडीमेंटेशन जांच के जरिये लाल रक्‍त कणिकाओं की स्थिति का पता लगाते हैं। अगर रेड ब्‍लड सेल्‍स का स्‍तर बढ़ जाये तो इससे सूजन हो जाती है और गर्भधारण करने में महिला असफल रहती है। यह जांच प्रक्रिया एचसीटी (हिस्‍टेरोसालपिनोगोग्राम) से पहले कराया जाता है, एचसीजी बांझपन के निदान के लिए किया जाने वाला टेस्‍ट है।
  • ब्‍लड शुगर भी गर्भधारण न कर पाने के बीच में रोड़ा बन सकता है। इसलिए अगर आप गर्भवती नहीं हो पा रही हैं तो ब्‍लड शुगर और इंसुलिन के स्‍तर की जांच अवश्‍य करायें।
  • इसे सिफलिस टेस्टिंग भी कहते हैं। हालांकि सिफलिस बांझपन के लिए जिम्‍मेदार कारक नहीं है, लेकिन इससे ग्रस्‍त महिला अगर गर्भधारण करती है तो इसका असर मां के साथ बच्‍चे पर भी पड़ता है। इसलिए अगर आप गर्भधारण करने में अक्षम है तो और गर्भावस्‍था की योजना बनाने से पहले ही सिफलिस की जांच करायें।
  • रूबेला एलजीजी जांच आपकी प्रतिरोधक क्षमता की जांच करता है और यह पता लगाता है कि कहीं आप रुबेला वायरस की शिकार तो नहीं हैं। हालांकि यह भी बांझपन के लिए जिम्मेदार प्रमुख कारणों में नहीं माना जाता है, लेकिन अगर किसी महिला के अंदर यह वायरस है तो इसके दुष्‍प्रभाव गर्भधारण की पहली तिमाही में ही दिख जाते हैं।
  • विटामिन बी3 या फोलेट के स्‍तर की जांच करना बहुत जरूरी है। इस जांच में यह भी पता चल जाता है कि कहीं आप एनीमिया की शिकार तो नहीं हैं। जबकि विटामिन डी3 की कमी और इसका कम स्‍तर होना भी बांझपन का प्रमुख कारण माना जाता है।
  • थॉयराइड ग्रंथि सही तरीके से काम नहीं कर रही है तो यह गर्भधारण में समस्‍या करती है। थॉयराइड की जांच के लिए टी3, टी4 और टीएसएच जांच की जाती है। इन जांच में पता चल जाता है कि कहीं आपकी थॉयराइड ग्रंथि अधिक सक्रिय तो नहीं है। इस ग्रंथि के ओवरएक्टिव होने पर यह ओव्‍यूलेशन और गर्भधारण के बीच में बाधक बनता है।

Dropsy during pregnancy

          गर्भावस्था के दौरान सूजन से बचने के लिए क्या करें

http://www.jkhealthworld.com/hindi/परिवार-कल्याण-नियोजन

परिवार-कल्याण-नियोजन

परिवार-कल्याण-नियोजनअगर आप गर्भावस्था के दौरान चलना बंद कर देंगी तो आपका शरीर सूज जाएगा। लगातार बैठे रहने से शरीर में पानी का जमाव बढ़ जाता है और यह शरीर के सूजने में मदद करता है। इसलिए थोड़े समय के अंतराल में चलते रहें और अपने डॉक्टर के अनुसार बताई गई कसरत करें। इसके अलावा पानी में डुबकी लगाने से आपको हल्का और अच्छा महसूस होगा। इसलिए गर्भावस्था में शरीर के सूजने से बचने के लिए आपको तैराकी करने की कोशिश करनी चाहिए। अगर वह संभव नहीं है तो अपने शरीर को टब में डुबाकर रखना भी काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। पर इस बात का ध्यान रखें कि पानी ज्यादा गर्म न हो क्योंकि गर्म पानी गर्भवती महिलाओं के लिए अच्छा नहीं होता।

          गर्भावस्था के दौरान हाथ-पांव की सूजन से बचने के लिए पैर को सीधा कर लें। काफी देर तक पैरे मोड़ कर बैठने से पैर में सूजन आ सकती है। शरीर में सही रक्त के बहाव के लिए काम के बीच में अंगड़ाई ले लेनी चाहिए। अगर संभव हो तो पैर के पास एक स्टूल रखें ताकि पैर को ज्यादा देर तक मोड़ कर रखने की ज़रुरत न पड़े। सोते समय बायीं करवट लेकर सोयें। इससे रक्त का बहाव शरीर में सही रहता है। इसलिए बायीं ओर होकर सोने की कोशिश करें। जब आप गर्भवती होती हैं तो आपका शरीर ज्यादा पानी इकठ्ठा करता है। इसको एडेमा कहते हैं। नमक से शरीर में पानी की मात्रा और बढ़ती है। इसलिए आपको खाने में नमक का इस्तेमाल कम करना चाहिए ताकि आपका शरीर न सूजे।

Excessive Sweats

            पसीना ज्यादा आए तो क्या करे उपाय

पसीना ज्यादा आए तो क्या करे उपाय

पसीना आना स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है
लेकिन जब पसीना बहुत ज्यादा आने लगे तो यह एक समस्या हो सकती है। ज्यादा पसीना आने से इसकी बदबू भी काफी परेशान करती है। अगर आप भी अधिक  पसीने की समस्या से परेशान हैं तो जानिए इस पर काबू पाने के आसान उपायों के बारे में-
  • हाइजीन का ध्यान दें। तेजपत्ते को सुखाकर पीस लें और उबालकर 24 घंटे के लिए छोड़ दें। इस पानी से शरीर के उन हिस्सों की रोज सफाई करें जिनमें आपको पसीना अधिक आता है।
  • सबसे ज्यादा पसीना अंडआर्म पर ही आता है। ऐसे में नहाने के बाद थोड़ा सा बेकिंग सोडा लेकर पानी के साथ मिला कर अपने अंडरआर्म और शरीर पर लगा लें। इसके बाद उसे साफ तौलिये से पोंछ लें। बेकिंग सोडा को आप डियो लगाने के बाद भी प्रयोग कर सकते हैं। डियो स्‍प्रे करें और फिर उसके ऊपर से थोड़ा बेकिंग सोडा लगा लें।
  • साफ सफाई का खास खयाल रखें। इससे पसीने को रोकने में बहुत मदद मिलती है। इससे पर्सनल हाइजीन होती है और आपकी त्‍वचा भी संक्रमण और बीमारी से बचती है। जब भी कपड़ा पहने तो उससे पहले अपने अंडरआर्म को सुखा लें। इससे कम पसीना आएगा।
  • गर्मियों में ताजा और हल्का भोजन करें। खीरापुदीनासंतरातरबूजमौसमी का सेवन करेंये प्यास बुझाने वाले होते हैंक्योंकि इसमें सोडियम और कैलोरी की मात्रा काफी कम और एंटी ऑक्सीडेंटकैल्शियम तथा विटामिन ए काफी मात्रा में होते हैं।
  • सेब का सिरका नहाने से पहले सेब के सिरके को अपने बगल में 30 मिनट के लिये रोजाना लगाएं। फिर हल्के साबुन से धो लें। अच्छा रिजल्ट पाने के लिये इसे रात को सोने से पहले लगा लें।
  • नींबू के प्रयोग से अधिक पसीनेा आने की समस्या को दूर रखने में मदद मिलती है। अगर आप अपने नहाने के पानी में एक नींबू निचोड़ लें फिर उससे नहाएं तो पूरा दिन तरोताजा रह सकते हैं।
  • नहाने के बाद अपने आर्मपिट पर खीरे की स्‍लाइस रगड़े। खीरे में एंटीऑक्‍सीड़ेंट पाया जाता है जो कि शरीर से बैक्‍‍टीरिया का नाश करके बदबू को आने से रोकता है।
  • हमेशा लाइट कॉटन पहने आप जो कपड़ा पहनते हैंकभी कभी वह भी आपको पसीना दे सकता है। इसलिये हमेशा कोशिश करें कि लाइट फैबरिक जैसे कॉटन आदि ही पहने। यह नमी को तुरंत ही सोख लेता है।
  • अधिक मात्रा में पानीजूस के सेवन से शरीर में गंध कम होती है। सुबह खाली पेट 1 गिलास पानी 500 मिलीग्राम व्हीट ग्रास के साथ सेवन करें। इसमें उपस्थित क्लोरोफिल की मात्रा शरीर की गंध को कम करती है।
  • कपडे को खरीदते समय रंगों का चयन ठीक प्रकार से करें। काले रंग में गरमी अधिक लगती हैपसीना भी अधिक निकलता है आप को कूल कलर पहनने चाहिए। जिन में सफेद और नीले रंग अधिक लाभदायक होते है। एक बार पहन लेने के बाद उसी कपडे को बिना धोए न पहनें।

hOt tOpiCs-    गर्भकाल, गर्भ-में-लड़के-या-लड़की-का-पता-लगाना, गर्भावस्था-के-दौरान-गर्भवती-स्त्री-का-भोजन


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